आज हम विश्वभर में मानवता के भीतर आध्यात्मिक रुचि के एक निस्तब्ध पुनर्जागरण के साक्षी बन रहे हैं। इसके साथ ही एक प्रश्न उठता है—“हम दिव्यता का अनुभव कैसे करें?”
दिव्यता को अपने जीवन में साकार करने की इस यात्रा में दाजी हमें बाहरी रूपों और अनुष्ठानों से आगे, हृदय के अंतरतम पवित्र स्थल तक ले जाते हैं—उस अन्तर्यामिन् तक, जो हमारा दिव्य स्वरूप है।
सहज मार्ग की प्राचीन प्रज्ञा और जीवंत परंपरा से प्रेरणा लेते हुए, वे हमारे अंतर्जगत का मानचित्र और उसमें आगे बढ़ने के साधन प्रस्तुत करते हैं
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आज हम विश्वभर में मानवता के भीतर आध्यात्मिक रुचि के एक निस्तब्ध पुनर्जागरण के साक्षी बन रहे हैं। इसके साथ ही एक प्रश्न उठता है—“हम दिव्यता का अनुभव कैसे करें?”
दिव्यता को अपने जीवन में साकार करने की इस यात्रा में दाजी हमें बाहरी रूपों और अनुष्ठानों से आगे, हृदय के अंतरतम पवित्र स्थल तक ले जाते हैं—उस अन्तर्यामिन् तक, जो हमारा दिव्य स्वरूप है।
सहज मार्ग की प्राचीन प्रज्ञा और जीवंत परंपरा से प्रेरणा लेते हुए, वे हमारे अंतर्जगत का मानचित्र और उसमें आगे बढ़ने के साधन प्रस्तुत करते हैं
| ISBN : | 9788168255234 |
|---|---|
| Publisher : | Embassy Books |
| Year Published : | 2026 |
| Pages Count : | 192 Pages |
| Edition Language : | Hindi |
| Book Format : | Paperback |